मंगल ग्रह जगतपालक विष्णु व पृथ्वी के संयोग का फल है। एक बार मंगल की मातोस्वरी पृथ्वी, भगवान विष्णु पर सुप्त हो गई थी और लावण्यवती तरुणी का रूप धारण
यमुनातीरोद्भव आत्रेय गोत्र सोम (चन्द्र) महर्षि अत्रि और साध्वी अनुसूया देवी की तृतीय संतति हैं। एक समय त्रिदेवों (विष्णु, शिव और ब्रह्मा) ने साध्वी अनुसूया की कोख से महर्षि अत्रि
नगाधिराज हिमालय की गोद में बसा गढ़वाल उत्तराखण्ड आदिकाल से
एक तुम,मेरे प्राणों में क्या जगी,टूट गए अवरोध सारे। बह
हमारे शरीर में स्थित मुट्ठी के आकार का हृदय एक
उत्तराखण्ड में जहाँ आजकल मानसून ने मार्गों की हालत खराब
गौं कु हरि सिंह कति दिन से बीमार छौ। आज
मंगल ग्रह जगतपालक विष्णु व पृथ्वी के संयोग का फल