एक तुम,मेरे प्राणों में क्या जगी,टूट गए अवरोध सारे। बह गया भेद मजधार और किनारों का,डूब गया अन्तर रोशनी के सैलाब में,सूरज और तारों का। आभासित होती रही बस तुम,
अष्टमी के दिन चार नन्हीं परियों को इधर से उधर दौड़ते-भागते देखा तो मन अतीत में लौट गया। उस समय हम भी इसी तरह इस घर से उस घर में
जब चुनाव की हूण बैठी ग्ये बात,फुलण बैठी सब्बी पार्टि्यूं
आजादी के बाद भारत में राजनैतिक दलों, क्षेत्रीय दलों एवं
देवात्मा हिमालय की गोद मे बसा उत्तराखण्ड गढव़ाल अनादिकाल से
सामग्री- विधि- पोषक मूल्य- चैंसू में निम्न पोषक तत्व पाए
ये वैज्ञानिक युग म भलै क्वी भाग्य तैं नि मानों
‘पलायन’ विषय पर सदैव चर्चा होती रही है और होती