माना कि जीवन जटिल रहस्यों की गुत्थी है, कभी कठिन तो कभी सरल, लेकिन कल्पना मात्र के लिए इसे दूर नहीं किया जा सकता। इसके लिए क्या अब किसी भी
पढ़ना-लिखना डिग्री डिप्लोमा सब कुछ है बेकार।कभी न दे पायेगा भैया ये तुझे रोजगार।। जूते चप्पल तो क्या एड़ियाँ भी घिस जायेगी।धोती-कुरता पैंट क्या लंगोट तक बिक जायेगी।। पीएचडी डिग्री
नगाधिराज हिमालय की गोद में बसा गढ़वाल उत्तराखण्ड आदिकाल से
अच्छी भली हंसती-खेलती गृहस्थी थी अनिल की। माँ, पत्नी, दो
सामग्री- विधि- पोषक मूल्य- बड़ी के साग में निम्न पोषक
हमारे शरीर में स्थित मुट्ठी के आकार का हृदय एक
सामग्री- विधि- हरी चटनी- पोषक मूल्य- मंडुवे की रोटी में
हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छांह।एक