घाम अछे गे छौ। जनि-जनि दिन ढलदु गै अर ब्यखुनि कि कुरबुरि छाण बैठि, थकान से चूर जगदम्बा कि चिन्ता वि बढदु गै। अबि क्षणि कतगा दूर च थीं ढकरि
उद्योग विहीन पहाड़ों में आजीविका के दो ही साधन हैं, खेती या नौकरी। कम्प्यूटर कृत वैश्वीकरण के इस युग में रोजगार पाने की सम्भावनायें तो दिन प्रतिदिन सीमित होती जा
कहीं थू-थू की रैली है, कहीं धिक्कार की रैली,कहीं त्रिशूल
ओ भारत के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों …. उठो जागो
सामग्री विधि- पोषक मूल्य- लेसू रोटी में निम्न पोषक तत्व
नहीं फरक अब गांव शहर में दोनों का है बुरा
सिन्धुदेशोद्भव आंगिरस गोत्रोत्पन्न भगवन गुरु-महर्षि कद्रू की तृतीय पुत्री श्रद्धा
मनुष्य की आयु बढ़ने के साथ-साथ शरीर के ऊतक कमजोर