मंगल ग्रह जगतपालक विष्णु व पृथ्वी के संयोग का फल है। एक बार मंगल की मातोस्वरी पृथ्वी, भगवान विष्णु पर सुप्त हो गई थी और लावण्यवती तरुणी का रूप धारण
किताबों के पन्नों में कविताएंजैसे दबा हो किताबों के बीच एक फूल,किसी के लिए नहीं उसकी सुगन्ध,उसके सौंदर्य का कोई अस्तित्व नहीं। चलो मैं तुम्हें दिखाऊं,यथार्थ की स्याही से, जीवन
औंसि कि कालि रात वितद ही सुबेर कु सूरज फिर
मैं अक्सर सुनता हूं अपने Clinic में आये हुए रोगी
ओ भारत के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों …. उठो जागो
देवात्मा हिमालय की गोद मे बसा उत्तराखण्ड गढव़ाल अनादिकाल से
‘प्रत्यक्ष देवता सूर्यः जगच्चक्षुः दिवाकरः’सूर्य-ब्रह्माण्ड गोलक का अधिपति है। पृथ्वी
हमारे शरीर में स्थित मुट्ठी के आकार का हृदय एक