संसदीय-मंदिरों को राजनैतिक कुपोषण व अवमूल्यन से बचाना बेहद जरूरी

आजादी के बाद भारत में राजनैतिक दलों, क्षेत्रीय दलों एवं स्वयंसेवी संस्थाओं तथा सामाजिक संगठनों की संख्या में उत्तरोत्तर वृद्धि

उत्तराखण्ड के हिमानी धामों की यात्रा

उत्तराखण्ड के हिमानी धामों की यात्रा

देवात्मा हिमालय की गोद मे बसा उत्तराखण्ड गढव़ाल अनादिकाल से ही ऋषि-मुि नयाे एवं संत-महात्माओं की तपस्थली रहा है। कालान्तर

साधन व साध्य के बेहतर तालमेल से ही विकास की धारा जनोन्मुखी होगी

साधन व साध्य के बहे तर तालमले से ही विकास की धारा जनाने मखुी होगी

राज्य निर्माण के दो दशक पश्चात भी राज्य मे सरकार द्वारा सरं क्षित किये गये क्षेत्र में रहने वाले नागरिकाे

नतमस्तक

नतमस्तक

अपनी सरकारों की चुस्त कार्यप्रणाली को देख कर एक विज्ञापन की याद आ जाती है, जिसमें बिस्किट के स्वाद में

एक तुम

एक तुम,मेरे प्राणों में क्या जगी,टूट गए अवरोध सारे। बह गया भेद मजधार और किनारों का,डूब गया अन्तर रोशनी के

सच बोलें तो दुनिया रूठे

सच बोलें तो दुनिया रूठे

सच बोलें तो दुनिया रूठे, झूठ कहें तो राम,सतपथ के अनुगामी का यहाँ जीना हुआ हराम। सच बोलें तो दुनिया

उत्तराखंड दर्पण


स्वास्थ्य/चिकित्सा


व्यंग्य


हमारे महान संत गुरु