देवात्मा हिमालय की गोद मे बसा उत्तराखण्ड गढव़ाल अनादिकाल से ही ऋषि-मुि नयाे एवं संत-महात्माओं की तपस्थली रहा है। कालान्तर
एक तुम,मेरे प्राणों में क्या जगी,टूट गए अवरोध सारे। बह गया भेद मजधार और किनारों का,डूब गया अन्तर रोशनी के
सच बोलें तो दुनिया रूठे, झूठ कहें तो राम,सतपथ के अनुगामी का यहाँ जीना हुआ हराम। सच बोलें तो दुनिया

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