‘पलायन’ विषय पर सदैव चर्चा होती रही है और होती रहेगी, परन्तु इसका सार्थक परिणाम कब निकलेगा यह एक आज तक यक्ष प्रश्न है। क्योंकि कटु सत्य यह है कि
ये वैज्ञानिक युग म भलै क्वी भाग्य तैं नि मानों पंणि मनिखि ही न, धरती कू हर जीव, भाग्य क हाथ कू एक खिलौना च। ‘तिसलि नदी’ नामक यीं कहानि
गौं कु हरि सिंह कति दिन से बीमार छौ। आज
लक्ष्मीदत्त नौटियाल , भिवाड़ी (राजस्थान)जात-पात में मत पड़ो, वर्ण भेद
रोग की चिकित्सा करने के बजाय रोग को न होने
आज के इस यान्त्रिकी युग में जहां मनुष्य श्रम से
किताबों के पन्नों में कविताएंजैसे दबा हो किताबों के बीच
महाभारत में देवलोक अथवा देवभूमि का क्षेत्र, वहां से बताया