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बसंति

आज शाम गौं म बसंति कि बरात औंणी छै, फिर बि गौंम न क्वी चहल-पहल छ अर न लोगूं म उत्साह ही दिखेंणू छौ। सोहन लाल काका अपंण भद्दाड्या कुटल

उगदु सूरज

उगदु सूरज

औंसि कि कालि रात वितद ही सुबेर कु सूरज फिर उगि औंद। वैकि सुनहरि किरण, हर एक क मुख पर एक चमक अर नयु उत्साह दे जौंद। तबि सब जीव

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