देवात्मा हिमालय की गोद मे बसा उत्तराखण्ड गढव़ाल अनादिकाल से ही ऋषि-मुि नयाे एवं संत-महात्माओं की तपस्थली रहा है। कालान्तर मे इन तपस्थलियाे ने देश की भावात्मक एकता एवं अखण्डता
कितने भाग्यशाली हैं हम कि हमारे नये-नये राज्य में दो राजधानियां झेलने की सामर्थ्य है। अंग्रेजों ने हमें इतनी सारी अच्छी-अच्छी बातें सिखाई तो दो अलग-अलग राजधानियों का प्रशिक्षण भी