ईश्वर ने प्राणिमात्र को आहार का विवेक दिया है पर मनुष्य को यह विवेक विशेष रूप में प्रदान किया है। भोजन का केवल स्वास्थ्य की दृष्टि से ही नहीं अपितु
सिन्धुदेशोद्भव आंगिरस गोत्रोत्पन्न भगवन गुरु-महर्षि कद्रू की तृतीय पुत्री श्रद्धा देवी का पुत्र है। इनके पितृवर महर्षि अंगिरा जी हैं। इनका जन्म वृहस्पति है। महानकाय होने के कारण और महान
रोग की चिकित्सा करने के बजाय रोग को न होने
देवात्मा हिमालय की गोद मे बसा उत्तराखण्ड गढव़ाल अनादिकाल से
आज के इस यान्त्रिकी युग में जहां मनुष्य श्रम से
गंभीरता, विवेकशक्ति का प्रतीक ग्रह बुध, देवगुरु बृहस्पति की धर्मपत्नी
कैंसर क्या है- कैंसर शरीर के उस ग्रोथ को कहते
एक तुम,मेरे प्राणों में क्या जगी,टूट गए अवरोध सारे। बह