आज शाम गौं म बसंति कि बरात औंणी छै, फिर बि गौंम न क्वी चहल-पहल छ अर न लोगूं म उत्साह ही दिखेंणू छौ। सोहन लाल काका अपंण भद्दाड्या कुटल
औंसि कि कालि रात वितद ही सुबेर कु सूरज फिर उगि औंद। वैकि सुनहरि किरण, हर एक क मुख पर एक चमक अर नयु उत्साह दे जौंद। तबि सब जीव
‘लकीर-पिटेणी’ मात्र कहानी का ही शीर्षक नहीं बल्कि एक ऐसे
ऐसा कुछ काम करो, अच्छा अंजाम हो,जीवन सफल बने जग
सामग्री- क्रमांक नाम मात्रा 1. गहथ 150 ग्रा0 2. प्याज
मध्य हिमालय की गोद में बसा हुआ भूखण्ड गढ़वाल ख्याति
यह सर्वदा सत्य है कि जिसका मन बिगड़ जाता है
उद्योग विहीन पहाड़ों में आजीविका के दो ही साधन हैं,