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सांसारिक-सुख, कला, चतुराई का प्रतीक ग्रह : शुक्र

ॐ भूर्भुवः स्वः भोजकट देशाद्भव भार्गव गोत्रोत्पन्न भगवान शुक्र के अवतरण पर ब्रह्मचक्र त्वरित गति से विशिष्ट स्थिति में गतिशील था। तुला लग्न उदित था। धनभाव में स्वगृही मंगल आरूढ़

मनमोहनी माया

मनमोहनी माया

अनपढ़ गंवार थे वो सन्त कबीराजो कहे माया बड़ी ठगनि हम जानीदौलत तेरी बस एक लंगोटी अरे फकीरा,देखा तूने बन्द कमरों में हीरे मोतियों का जखीरा,देखी तूने कभी बेशकीमती बी.एम.डब्लू

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