अष्टमी के दिन चार नन्हीं परियों को इधर से उधर दौड़ते-भागते देखा तो मन अतीत में लौट गया। उस समय हम भी इसी तरह इस घर से उस घर में
भारत का स्विट्जरलैंड कहलाने वाली हमारी देवभूमि उत्तराखण्ड के आम जनमानस को आशा ही नहीं अपितु पूर्ण विश्वास था कि अपना राज्य बनने के पश्चात तो उसके दिन अवश्य बहुरेंगे।
राज्य निर्माण के दो दशक पश्चात भी राज्य मे सरकार
आज पंडित ब्रह्मानंद क चौक म तिरपाल छौ तड्यूं। द्वी
गढ़वाल हिमालय के अंतर्गत अनेक सुरम्य ऐतिहासिक स्थल हैं जिनकी
सामग्री- विधि- पोषक मूल्य- ढुंगले में निम्न पोषक तत्व पाए
एक तुम,मेरे प्राणों में क्या जगी,टूट गए अवरोध सारे। बह
मनुष्य की आयु बढ़ने के साथ-साथ शरीर के ऊतक कमजोर