मंगल ग्रह जगतपालक विष्णु व पृथ्वी के संयोग का फल है। एक बार मंगल की मातोस्वरी पृथ्वी, भगवान विष्णु पर सुप्त हो गई थी और लावण्यवती तरुणी का रूप धारण
अच्छी भली हंसती-खेलती गृहस्थी थी अनिल की। माँ, पत्नी, दो बच्चे- एक लड़की एक लड़का। माँ कभी उसके पास रहती, कभी बड़े बेटे के पास मुंबई और बीच-बीच में पहाड़
मंगल ग्रह जगतपालक विष्णु व पृथ्वी के संयोग का फल
जब चुनाव की हूण बैठी ग्ये बात,फुलण बैठी सब्बी पार्टि्यूं
पढ़ना-लिखना डिग्री डिप्लोमा सब कुछ है बेकार।कभी न दे पायेगा
सामग्री- विधि- पोषक मूल्य- उड़द की दाल की पकौड़ी में
हमारे शरीर में स्थित मुट्ठी के आकार का हृदय एक
धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष इस पुरुषार्थ चतुष्ठय की सिद्धि