कहीं थू-थू की रैली है, कहीं धिक्कार की रैली,कहीं त्रिशूल दिखाते हैं, कहीं तलवार की रैली।सियासत में प्रदूषण है, विचार गंगा ही मैली है,चलो पटना में पिटने को वहां लाठी
अच्छी भली हंसती-खेलती गृहस्थी थी अनिल की। माँ, पत्नी, दो बच्चे- एक लड़की एक लड़का। माँ कभी उसके पास रहती, कभी बड़े बेटे के पास मुंबई और बीच-बीच में पहाड़
मानव जन्म हीरे-सा अनमोल है, जिसे स्थायी व्यक्ति भौतिक प्रगति
मैं अक्सर सुनता हूं अपने Clinic में आये हुए रोगी
ईश्वर ने प्राणिमात्र को आहार का विवेक दिया है पर
कैंसर क्या है- कैंसर शरीर के उस ग्रोथ को कहते
सिन्धुदेशोद्भव आंगिरस गोत्रोत्पन्न भगवन गुरु-महर्षि कद्रू की तृतीय पुत्री श्रद्धा
लक्ष्मीदत्त नौटियाल , भिवाड़ी (राजस्थान)जात-पात में मत पड़ो, वर्ण भेद