22.2 C
Dehradun
Wednesday, May 25, 2022
लेख नवरात्रि पावन पर्व

नवरात्रि पावन पर्व

सर्वरूप मयी देवी सर्वं देवीमयं जगत्।

अतोहं विश्वरूपां तां नमामि परमेश्वरीम्।।

विश्व के संपूर्ण रूप देवी से ही प्रकट हैं तथा अखिल विश्व भी देवीमय ही है। माँ भगवती परांबा शक्ति का प्रतीक है। शक्ति एवं शक्तिमान की ही संसार में पूजा है। हर वस्तु में शक्ति है। लोहे की छड़ में शक्ति है कमजोर व्यक्ति उसे मोड़ नहीं सकता किंतु लोहे की छड़ से ज्यादा शक्तिशाली व्यक्ति उसे मोड़ सकता है। विश्व का संपूर्ण कार्य शक्ति से ही चलता है शक्ति दिखाई नहीं देती यही उसका वैशिष्ठय है। कितनी लंबी ट्ेन दौड़ रही है इतना विशाल विमान उड़ रहा है किंतु सब विद्युत शक्ति के कारण। हर कार्य में शक्ति की आवश्यकता है। इसलिये शक्ति की आराधना से ही शक्ति का विकास होगा। जैसे सिंगल फेज में पावर कम और 3 पेज में पावर अधिक होती है उसी प्रकार संसार में शक्ति तो माँ ने सभी को दे रखी है, पर वह सिंगल फेज की तरह है और जो मन वाणी और शरीर से माँ को समर्पित हो जाता है वह शक्ति का पावर हाउस बन जाता है। शक्ति प्रदान करने वाली पराम्बा की उपासना का सर्वोत्तम पर्व है नवरात्रि। मूल रूप से नवरात्रि का पर्व 1 वर्ष में चार बार सम्प्राप्त होता है। चैत्र एवं असूज शुक्ल पक्ष में प्रकट नवरात्र एवं आषाढ़ तथा माघ मास में गुप्त नवरात्रि के रूप में। तथापि चैत्र और आश्विन में ही विशेष रूप से संपूर्ण सनातन जनमानस परंपरा में नवरात्र का पर्व मनाया जाता है। यह बसंत और शरण ऋतु का प्रधान पर्व है। यही समय ऋतु परिवर्तन का भी होता है दोनों अवसरों पर उपवास एवं अल्पाहार के माध्यम से अग्रिम जलवायु के लिये स्वयं को परिपक्व बनाकर शक्ति से संपन्न करने का अवसर होता है। नवरात्रि में माँ भगवती के नौ रूपों का भिन्न-भिनन पूजन किया जाता है तथा सप्तशती के पाठ के माध्यम से इन सभी को प्रसन्न किया जाता है।


‘प्रथमं शैलपुत्री च द्वितीयं ब्रह्मचारिणी।

तृतीय चंद्रघंटेति कूष्माण्डेति चतुर्थेकम।।

पंचम स्कन्दमातेति षष्ठं कात्यायनीति च।

सप्तमं कालरात्रि महागौरीति आष्टमम्।

नवमं सिद्धिदात्री च नवदुर्गाः प्रकीर्तिताः।।

मार्कंडेय पुराण के अनुसार देवता और दानवों में प्राचीनतम कार्य में घोर संग्राम हुआ जिसमें देवता पराजित होकर ब्रह्मा विष्णु महेश की शरण में पहुंचे तथा तीनों देवताओं के मस्तिष्क से दिव्य ज्योति प्रकट हुई। भगवान शिव के तेज से उसका मुख का भाग, भगवान विष्णु के तेज से उसका कटि पर्यंत तथा ब्रह्मा के प्रकट तेज से चरण पर्यंत का भाग निर्मित हुआ और एक दिव्य स्त्री के रूप में परिणत हो गई। साथ ही संपूर्ण देवताओं के तेजोमय शक्ति भी उसी में समाहित हो गई तथा हिमालय पर्वत ने उसे वाहन के रूप में सिंह प्रदान किया। इसी प्रकार विभिन्न प्रकार की आसुरी शक्तियों के लिये उसने नौ पृथक-पृथक रूप धारण कर असुरों का संहार किया तथा अपने उपासकों के लिये करुणामय रूप में स्वयं को महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती, त्रिगुणात्मक रूप में स्थापित किया।


अतुलं तत्र तत्तेजः सर्वदेव शारीरजम्।

एकस्थं तदभून्नारी व्याप्त लोकत्रयं त्विषा।।

माँ के विविध रूप भक्तों के लिये उत्पन्न परिस्थिति में करुणा के प्रतीक ही है। कहीं रणचंडी तो कहीं करुणामई प्रतिमूर्ति इन सब में अपने उपासिकों के प्रति दया भाव ही विद्यमान है। जिस प्रकार गाय बच्चे के लिये जितनी दयामयी होती है, बच्चे पर आक्रमण करने वाले के लिये उतनी ही कठोर। अपने नवजात बच्चे की गंदगी साफ करने के लिये अपने बच्चे को जीभ से साफ करते हैं लेकिन उसके बच्चे पर कोई भेड़िया या कुत्ता आदि का हमला करने के लिये आ जाए तो वह उस पर सिंहिनी बनकर टूट पड़ती है ठीक उसी प्रकार माँ भगवती केस स्वभाव और चित्त में तो सदा सर्वदा करना कृपा ही है किंतु समर में निष्ठुरता भक्तों का कल्याण ही करती है।

नवरात्रि व्रत की विधि- नवरात्रि के सर्वोत्तम अवसर पर प्रत्येक व्यक्ति को व्रत करना चाहिये, हो सके तो निराहार रहे अथवा दुग्ध एवं फलों का सेवन करके व्रत विधि करनी चाहिये। हो सके तो 9 दिन पर्यंत उपवास करें अन्यथा 3 दिन। यह सामर्थ्य अनुसार 2 दिन अवश्व करें। भगवती ज्योति का ही प्रतीक है वस्तु अखंड दीपक का नवरात्रि पर बड़ा महत्व माया गया है। क्योंकि देवताओं से सर्वप्रथम माँ भगवती ज्योति के रूप में ही प्रकट हुई थी। इसलिये ज्योति शक्ति का प्रतीक है। साथ ही बाल कन्याओं को भोजन कराना नवरात्रि पूजन का सर्वश्रेष्ठ है। ध्यान रहे कि कन्या की अवस्था 2 वर्ष से कम और 10 वर्ष से अधिक नहीं होनी चााहिये सुंदर ओर स्वस्थ कन्या को भोजन कराना चाहिये ज्ञान प्राप्त करने वाले/करने की इच्छा वाले को ब्राह्मण कन्या को भोजन कराना चाहिये, शत्रुओं पर विजय प्राप्ति हेतु क्षत्रिय कन्या तथा धन प्राप्ति हेतु वैश्व कन्या का पूजन भोजन सर्वोत्तम माना गया है। इसी प्रकार बढ़ती तिथियों के क्रम से भी कन्या पूजन का विधान शास्त्रों में बताया गया है। जैसे पहले दिन 1 कन्या को जिमाना दूसरे दिन 2 इसी प्रकार नवें दिन नौ। इस विधि से प्रथम दिवस से बढ़ते क्रम से 9 दिन में संपूर्ण संख्या 45 हो जाती है और 45 का मूल अंक भी 9 ही है जो संपूर्णता का प्रतीक है।

इस जगत में जिसने भी आस्था और विश्वास के साथ जगदंबा का आराधन किया उन भक्तों के प्रति भगवती के द्वारा किये गये अद्भुत चमत्कार आज भी भक्तों को प्रेरित करते हैं। गुरु गोविन्द सिंह जी ने नैना देवी के गुफा में बैठकर साधना की तथा धूनी जलाकर 100 किंवटल सामग्री से हवन किया यह धूनी आज भी निरंतर तब से जल रही है। उन्हें भगवती से उसी धूनी से कृपाण (तलवार) प्राप्त हुई और उससे उन्होंने हिंदू धर्म की रक्षा की तथा आनंदपुर में खालसा पंथ की स्थापना की जो आज सिख धर्म के नाम से सुप्रसिद्ध है। छात्रपति शिवाजी ने भी माँ की आराधना से ही देश की रक्षा का प्रण लिया। महाभारत के युद्ध से पूर्व भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा अर्जुन को भी शक्ति की उपासना का आदेश प्राप्त हुआ तथा श्री राम ने भी रावण से युद्ध से पूर्व में शक्ति की उपासना की तथा विश्व विजेता बने। इसी प्रकार अनेक चमत्कार है जो इस कठिन कलिकाल (कलौ चण्डी विनयकौ) में हमें माँ की उपासना के लिये प्रेरित करते हैं। आइऐ सभी मातृप्रेमी व्रतोपासना से अवश्य मात्र कृपा प्राप्त करें।

डॉ0 कुलदीप चंद्र पंत, हरिद्वार
साहित्य विभागाध्यक्ष | जय भारत साधु महाविद्यालय, हरिद्वार | पी.एच.डी.: ‘श्रीमद् भागवत महापुराण में प्रतिपादित दार्शनिक सिद्धांत’

Get in Touch

  1. An outstanding periodical newspaper….Transpaorts the natives to the nook n corner of our lushgreen landscape uttarakhand….✌️👌

  2. Excellent initiative 👍
    Keep on doing good work 🙏
    It will help in Timely updating regarding our UTTRAKHAND news through on line .

  3. Shailvani,infact,serves as the mirror of uttrakhand’s cultural and societal activities… doesn’t matter in which corner of the world u r living,it carries u close to ur native people n helps retain the essance of being a Garhwali.❤️😍

  4. Balodhi ji…many many congratulations to you for taking Shailwani to just another level. Since the time of its inception Shailwani has always served as a tool to unify the Migrant Uttarakhandis…and connect them with the latest happenings in Uttarakhand. Thanks and good luck.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest Posts

खतरों की आहट – हिंदी व्यंग्य

कहते हैं भीड़ में बुद्धि नहीं होती। जनता जब सड़क पर उतर कर भीड़ बन जाये तो उसकी रही सही बुद्धि भी चली जाती...

नतमस्तक – हिंदी व्यंग्य

अपनी सरकारों की चुस्त कार्यप्रणाली को देख कर एक विज्ञापन की याद आ जाती है, जिसमें बिस्किट के स्वाद में तल्लीन एक कम्पनी मालिक...

कुम्भ महापर्व 2021 हरिद्वार

कुंभ महापर्व भारत की समग्र संस्कृति एवं सभ्यता का अनुपम दृश्य है। यह मानव समुदाय का प्रवाह विशेष है। कुंभ का अभिप्राय अमृत कुंभ...

तक्र (मट्ठे) के गुण, छाछ के फायदे

निरोगता रखने वाले खाद्य-पेय पदार्थों में तक्र (मट्ठा) कितना उपयोगी है इसको सभी जानते हैं। यह स्वादिष्ट, सुपाच्य, बल, ओज को बढ़ाने वाला एवं...

महा औषधि पंचगव्य

‘धर्मार्थ काममोक्षणामारोण्यं मूलमुन्तमम्’ इस शास्त्रोक्त कथन के अनुसार धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष हेतु आरोग्य सम्पन्न शरीर की आवश्यकता होती है। पंचगव्य एक ऐसा...