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Wednesday, May 25, 2022

शैलवाणी

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फूलों की घाटी का नैसर्गिक सौंदर्य

उत्तराखण्ड के सौंदर्य की तुलना विदेशी पर्यटकों ने स्विट्जरलैण्ड से की है। विश्व विख्यात पर्वतारोही डॉ0 टी0जी0 लौंगस्टाफ तो यहां तक कह गये हैं...

त्वे से भला छन पशु-पराणी

हे मनिखी! त्वे से भला, पशू-पराणी। आतंकवाद उग्रवाद, तौन नि जाणी।। पशु-पराणी त्वे अपणू, दूध पिलांदीं, तौंकु माँस काटि-काटि, तू कनु खांदी। फिर भि तौन त्वे दगड़ी, दुश्मनी...

सर्गा दिदा पाणि…

घनघोर अन्ध्यरु; रुणझुण बरखा, हैड़ा डाळु मूड़ ग्वाठु ग्वरूं तैं कादै लग्यां फट्ट-फट्ट कना छिन बीच-बीच म मि गुठ्यळु जबदस्ति खसुंणूं कखि बाघ त... गड़गड़ाट, चड़चड़ाट अबि बुगान्द तबि अचानक जोर...

चदरि, रंग बिरंगी (गढ़वाली कविता)

दुन्यां कि यिं चदरि पर, रंग कति रच्यां छना, पैन गार कांड कखि, कखी फूल बिछ्यां छना। भ्यूंळ डाळिमु घुघुति, घुर्र-घुर्र घूरणि च, मयल्दू ज्युकुड़ि कैकि, झुर्र-झुर्र...

लाश अर कफन – चिता पर धरिं एक लाश

चिता पर धरिं एक लाश, मिण मिणैकि, कफनम बोल्द- ‘‘अरे छुछा ? मित त फुके-फुके पण- तु किले फुकेणू छई मित मृत्युक मर्यूं छौ, तु बेमौत किले मरणू छई। आगि...

बस स्टौप – जिन्दगी की डूंडी-बंगी

जिन्दगी की डूंडी-बंगी ऊबड़-खाबड़ सड़क पर भगणी च मनिख शरीर की ‘बस’, उछल-कूद मचाणी धक्का-मुकि खाणी। जीर्ण-शीर्ण ह्वेगे ‘बॉडी’ ढिल्ल ह्वेगें इन्द्रियोंक ‘नट’, ‘बोल्ट’ तीड़ि गी खुटुक ‘टायर’ फिर बिदहाड़नु च अहम्...

उत्तराखण्ड में प्रस्फुटित अध्यात्म विज्ञान एवं साधना के विविध रूप

हिमगिरि के उत्तुंग शिखर पर, बैठ शिला की शीतल छांह। एक पुरुष भीगे नयनों से,देख रहा था प्रलय प्रवाह।। (कामायनी) उपर्युक्त काव्य धारा के कल्पनाजनित विश्वास...

दे दो छूट जवानों को

दे दो छूट जवानों को तुम, कार्गिल के मस्तानों को। देश के इन दीवानों को, दुश्मन का नाम मिटाने को।। अब न सहेंगे अब न रुकेंगे,...

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खतरों की आहट – हिंदी व्यंग्य

कहते हैं भीड़ में बुद्धि नहीं होती। जनता जब सड़क पर उतर कर भीड़ बन जाये तो उसकी रही सही बुद्धि भी चली जाती...

नतमस्तक – हिंदी व्यंग्य

अपनी सरकारों की चुस्त कार्यप्रणाली को देख कर एक विज्ञापन की याद आ जाती है, जिसमें बिस्किट के स्वाद में तल्लीन एक कम्पनी मालिक...

कुम्भ महापर्व 2021 हरिद्वार

कुंभ महापर्व भारत की समग्र संस्कृति एवं सभ्यता का अनुपम दृश्य है। यह मानव समुदाय का प्रवाह विशेष है। कुंभ का अभिप्राय अमृत कुंभ...

तक्र (मट्ठे) के गुण, छाछ के फायदे

निरोगता रखने वाले खाद्य-पेय पदार्थों में तक्र (मट्ठा) कितना उपयोगी है इसको सभी जानते हैं। यह स्वादिष्ट, सुपाच्य, बल, ओज को बढ़ाने वाला एवं...

महा औषधि पंचगव्य

‘धर्मार्थ काममोक्षणामारोण्यं मूलमुन्तमम्’ इस शास्त्रोक्त कथन के अनुसार धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष हेतु आरोग्य सम्पन्न शरीर की आवश्यकता होती है। पंचगव्य एक ऐसा...