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Wednesday, May 25, 2022
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गढ़वाली कविता

नेताजी – जब चुनाव की हूण बैठी ग्ये बात,

जब चुनाव की हूण बैठी ग्ये बात,फुलण बैठी सब्बी पार्टि्यूं क खुला हाथ।सब्बी भाग-भागिक नि थकणा छन,अपण-अपण दांव लगाणा छन। छ्वीट जात्यिूं कु त वो...

बस स्टौप – जिन्दगी की डूंडी-बंगी

जिन्दगी की डूंडी-बंगी ऊबड़-खाबड़ सड़क पर भगणी च मनिख शरीर की ‘बस’, उछल-कूद मचाणी धक्का-मुकि खाणी। जीर्ण-शीर्ण ह्वेगे ‘बॉडी’ ढिल्ल ह्वेगें इन्द्रियोंक ‘नट’, ‘बोल्ट’ तीड़ि गी खुटुक ‘टायर’ फिर बिदहाड़नु च अहम्...

लाश अर कफन – चिता पर धरिं एक लाश

चिता पर धरिं एक लाश, मिण मिणैकि, कफनम बोल्द- ‘‘अरे छुछा ? मित त फुके-फुके पण- तु किले फुकेणू छई मित मृत्युक मर्यूं छौ, तु बेमौत किले मरणू छई। आगि...

चदरि, रंग बिरंगी (गढ़वाली कविता)

दुन्यां कि यिं चदरि पर, रंग कति रच्यां छना, पैन गार कांड कखि, कखी फूल बिछ्यां छना। भ्यूंळ डाळिमु घुघुति, घुर्र-घुर्र घूरणि च, मयल्दू ज्युकुड़ि कैकि, झुर्र-झुर्र...

सर्गा दिदा पाणि…

घनघोर अन्ध्यरु; रुणझुण बरखा, हैड़ा डाळु मूड़ ग्वाठु ग्वरूं तैं कादै लग्यां फट्ट-फट्ट कना छिन बीच-बीच म मि गुठ्यळु जबदस्ति खसुंणूं कखि बाघ त... गड़गड़ाट, चड़चड़ाट अबि बुगान्द तबि अचानक जोर...

त्वे से भला छन पशु-पराणी

हे मनिखी! त्वे से भला, पशू-पराणी। आतंकवाद उग्रवाद, तौन नि जाणी।। पशु-पराणी त्वे अपणू, दूध पिलांदीं, तौंकु माँस काटि-काटि, तू कनु खांदी। फिर भि तौन त्वे दगड़ी, दुश्मनी...

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