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Wednesday, May 25, 2022
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व्यंग्य

खतरों की आहट – हिंदी व्यंग्य

कहते हैं भीड़ में बुद्धि नहीं होती। जनता जब सड़क पर उतर कर भीड़ बन जाये तो उसकी रही सही बुद्धि भी चली जाती...

नतमस्तक – हिंदी व्यंग्य

अपनी सरकारों की चुस्त कार्यप्रणाली को देख कर एक विज्ञापन की याद आ जाती है, जिसमें बिस्किट के स्वाद में तल्लीन एक कम्पनी मालिक...

हमारे महान संत गुरु

मानव जन्म हीरे-सा अनमोल है, जिसे स्वार्थी व्यक्ति भौतिक प्रगति की सीढ़ियां चढ़ने में व्यर्थ गंवाता है। इसे तराश कर चमकाने का काम गुरु...

एक मुकदमा और सही

ओ भारत के राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों .... उठो जागो और दौड़ो। दौड़ौ अपना-अपना अस्तित्व बचाने के लिये। कुछ देशद्रोही टाइप के लोग देशभक्त...

दो राजधानियों का ऐश्वर्य

कितने भाग्यशाली हैं हम कि हमारे नये-नये राज्य में दो राजधानियां झेलने की सामर्थ्य है। अंग्रेजों ने हमें इतनी सारी अच्छी-अच्छी बातें सिखाई तो...

कन्या-धन – हिंदी व्यंग्य

अष्टमी के दिन चार नन्हीं परियों को इधर से उधर दौड़ते भागते देखा तो मन अतीत में लौट गया। उस समय हम भी इसी...

हम नहीं सुधरेंगे

सरकार नई नेता नये, उनके सचिव सहयोगी सब नये। काम के तरीके और सिद्धान्त भी नये। पर हम तो वही हैं। हाथ पर हाथ...

परपंच – गढ़वाली व्यंग्य

परपंचै महिमा अपार च, परपंच एक खास किस्मौ भोत ही पुरणी कला कौंल च, परपंच अप्णाप मा एक शास्त्र च जैकू ज्ञान सरया दुनिया...

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