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Wednesday, May 25, 2022
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गढ़वाली कहानियां

‘गूंगकि बलि’ – गढ़वाली कहानी

आज पंडित ब्रह्मानंद क चौक म तिरपाल छौ तड्यूं। द्वी चार कुर्सि अर कुछ चारपायूं म दरि बिछै कि बैठक सजई छै। बैठक म...

अपणु खून – गढ़वाली कहानी

गौं कु हरि सिंह कति दिन से बीमार छौ। आज वेकि हालत कुछ जादा ही खराब छै। कुछ लोगु क नजर म त वू...

सुंदरा बौ – गढ़वाली कहानी

जथौ नाम तथौ गुण की या सौगात, भगवान कै बिरल तैं ही दींद, निथर जादातर मनिख्यूं क नाम अर गुणों म विरोधाभाष ही मिलद।...

तिसाळि नदी – गढ़वाली कहानी

ये वैज्ञानिक युग म भलै क्वी भाग्य तैं नि मानों पंणि मनिखि ही न, धरती कू हर जीव, भाग्य क हाथ कू एक खिलौना...

भाग्य की भताक – गढ़वाली कहानी

अपंणि-अपंणि समझ क अनुसार मनिख्यूंन भाग्य कू नामकरण कैर। कैन वेतैं समैं नाम दे, त कैन संयोग बोलि। कुछ बुद्धिजीव्यूं न वेकु तैं अदृश्य...

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