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Thursday, December 1, 2022
कविता और ग़ज़ल ग़ज़ल वहां जो बैठे हैं सत्ता के मद में होकर चूर - ग़ज़ल

वहां जो बैठे हैं सत्ता के मद में होकर चूर – ग़ज़ल

वहां जो बैठे हैं सत्ता के मद में होकर चूर ।

समझ लें वो कि जरूरी नहीं, हो दिल्ली दूर ।।

दिलों में जो भी हो उनके सुराख नफरत के ।

उन्हें वो ठीक करा लें यहां आकर बंगलूर ।

दिलों के ठीक होेने से जो प्यार फैलेगा ।

हमें यकीन है नफरत को करेगा वो दूर ।।

नहीं यह खामखयाली, जो कह रहा ‘शैवाल’ ।

न हो यकीं तो जरा देखें जा कर बेबी नूर ।

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